उत्तराखंड में एप्पल मिशन, पॉलीहाउस और कीवी-ड्रैगन फ्रूट की खेती को मिलेगी नई रफ्तार,अधिकारियों की जवाबदेही तय

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देहरादून। उत्तराखंड में कृषि और बागवानी क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जाने तथा किसानों को योजनाओं का सीधा लाभ पहुंचाने के लिए प्रदेश सरकार ने सख्त रुख अपना लिया है। कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट लहजे में चेतावनी देते हुए निर्देश दिए हैं कि किसानों के सभी लंबित भुगतानों की विसंगतियों को एक सप्ताह के भीतर दूर कर उनका भुगतान सुनिश्चित किया जाए। मंत्री ने साफ किया कि योजनाओं की सफलता केवल कागजी आंकड़ों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसका वास्तविक लाभ धरातल पर किसानों की जेब तक पहुँचना अनिवार्य है।

उत्तराखंड में किसानों को बागवानी और कृषि योजनाओं का लाभ समय पर दिलाने के लिए सरकार ने विभागीय अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की तैयारी तेज कर दी है। कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसानों से जुड़ी योजनाओं में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने पॉलीहाउस, एप्पल मिशन, कीवी समेत विभिन्न योजनाओं के लंबित भुगतानों में आ रही विसंगतियों को एक सप्ताह के भीतर दूर करने को कहा है। साथ ही वित्तीय वर्ष 2026-27 के निर्धारित बजट का शत-प्रतिशत उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। देहरादून में आयोजित समीक्षा बैठक में कृषि मंत्री ने प्रदेशभर में चल रही बागवानी और कृषक कल्याण योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में सभी जिलों के मुख्य उद्यान अधिकारी और संबंधित विभागीय अधिकारी मौजूद रहे। मंत्री ने कहा कि सरकारी योजनाओं का उद्देश्य केवल बजट खर्च करना नहीं, बल्कि उसका वास्तविक लाभ किसानों तक पहुंचाना है। उन्होंने अधिकारियों से योजनाओं के क्रियान्वयन की नियमित निगरानी करने और निर्धारित समयसीमा में लक्ष्य पूरा करने को कहा। बैठक में एप्पल मिशन की जनपदवार प्रगति की समीक्षा के दौरान सेब की अति सघन बागवानी के तहत किए जा रहे कार्यों की जानकारी ली गई। मंत्री ने सेब उत्पादक किसानों के लंबित भुगतानों का जल्द निस्तारण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि भुगतान में किसी प्रकार की तकनीकी या विभागीय विसंगति है तो उसे प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाए, ताकि किसानों को उनके हक का पैसा समय पर मिल सके। पॉलीहाउस, एप्पल मिशन, कीवी और अन्य योजनाओं के भुगतान में आ रही समस्याओं को लेकर अधिकारियों को एक सप्ताह की समयसीमा दी गई। मंत्री ने स्पष्ट किया कि किसानों को योजनाओं का लाभ देने में देरी सीधे तौर पर उनकी आय और कृषि गतिविधियों को प्रभावित करती है। उत्तराखंड में पारंपरिक बागवानी के साथ फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने पर भी बैठक में जोर दिया गया। कृषि मंत्री ने कहा कि राज्य के पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों में कीवी और ड्रैगन फ्रूट जैसी फसलों की अच्छी संभावनाएं हैं। उन्होंने अधिक से अधिक किसानों को इन फसलों से जोड़ने और उन्हें विभागीय योजनाओं के माध्यम से जरूरी सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। सरकार का जोर किसानों के लिए आय के नए विकल्प तैयार करने और पारंपरिक खेती पर निर्भरता कम करते हुए आधुनिक बागवानी को बढ़ावा देने पर है।मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सब्जियों और अन्य फसलों के बीज किसानों को बुआई का समय आने से पहले उपलब्ध करा दिए जाएं। उन्होंने कहा कि बीज की कमी के कारण किसानों का बुआई चक्र प्रभावित नहीं होना चाहिए। योजनाओं के लिए आवश्यक तैयारियां समय से पूरी करने और किसानों की जरूरत के अनुरूप विभागीय व्यवस्था मजबूत करने को कहा गया। नाबार्ड योजना के तहत बनाए जा रहे पॉलीहाउस की प्रगति की भी समीक्षा की गई। कृषि मंत्री ने निर्माण कार्यों में तेजी लाने और निर्धारित लक्ष्य समय पर पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने पॉलीहाउस निर्माण की नियमित निगरानी पर जोर देते हुए कहा कि संरक्षित खेती को बढ़ावा देने वाली योजनाओं में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। बैठक में मधुमक्खी पालन यानी मौन पालन को बढ़ावा देने पर भी चर्चा हुई। मंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के पर्वतीय और मैदानी दोनों क्षेत्रों में मौन पालन किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन सकता है। उन्होंने अधिक से अधिक किसानों को इससे जोड़ने, प्रशिक्षण देने और सरकारी योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। कृषि मंत्री ने अधिकारियों को दो टूक कहा कि योजनाओं की सफलता केवल वित्तीय खर्च के आंकड़ों से नहीं, बल्कि किसानों को मिले वास्तविक लाभ से तय होगी। उन्होंने सभी योजनाओं की लगातार समीक्षा, भुगतान में तेजी और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।