मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की नौकरशाही को चेतावनी विकास परियोजनाओं में देरी पर होगी सख्त कार्रवाई

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उत्तराखंड में चल रही विकास परियोजनाओं की कछुआ चाल पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। मुख्यमंत्री ने दो टूक शब्दों में नौकरशाही को चेतावनी दी है कि राज्य के विकास और जनसुविधाओं से जुड़े कार्यों में किसी भी तरह की सुस्ती बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अगर परियोजनाओं के क्रियान्वयन में बेवजह की देरी पाई गई, तो संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर उनके खिलाफ तत्काल कठोर दंडात्मक कार्रवाई (सस्पेंशन व विभागीय एक्शन) अमल में लाई जाएगी।

मुख्यमंत्री ने सचिवालय में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में 'प्रगति पोर्टल' के माध्यम से परिवहन, ऊर्जा, लोक निर्माण विभाग (लोनिवि), राष्ट्रीय राजमार्ग और सीमा सड़क संगठनसमेत विभिन्न विभागों की लगभग 6949.61 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत वाली 12 महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं की बारीकी से समीक्षा की। समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कार्यदायी संस्थाओं और विभागाध्यक्षों को एक सख्त डेडलाइन (अल्टीमेटम) सौंप दी है। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन विकास परियोजनाओं में अब तक 50 प्रतिशत या उससे अधिक का कार्य धरातल पर पूरा हो चुका है, उन्हें आगामी 15 अक्टूबर तक हर हाल में शत-प्रतिशत पूर्ण कर जनता को समर्पित किया जाए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को झकझोरते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत-2047' के महान संकल्प को पूरा करने में उत्तराखंड की ओर से हर एक विभाग और अधिकारी का शत-प्रतिशत योगदान बेहद जरूरी है। इसमें किसी भी स्तर पर ढिलाई अक्षम्य होगी। बैठक में सीएम धामी ने इस बात को रेखांकित किया कि उत्तराखंड एक सीमांत और धार्मिक पर्यटन राज्य है। ऐसे में चारधाम यात्रा मार्ग, सीमांत क्षेत्रों की सामरिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण सड़कें, विद्युत आपूर्ति तथा परिवहन से जुड़ी परियोजनाएं राज्य के चौमुखी विकास और आम जनमानस की सुविधा के लिए रीढ़ की हड्डी हैं। उन्होंने कहा कि इन बुनियादी ढांचों के समयबद्ध (टाइम-बाउंड) तरीके से पूरे होने पर ही प्रदेश में पर्यटन, स्थानीय व्यापार, नए निवेश और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसरों को तेजी से बढ़ावा मिलेगा। परियोजनाओं की रफ्तार पर सीधी नजर रखने के लिए मुख्यमंत्री ने एक सख्त मॉनिटरिंग सिस्टम भी लागू कर दिया है। उन्होंने घोषणा की कि निर्माण कार्यों में तेजी लाने के लिए अब खुद मुख्यमंत्री स्तर पर हर महीने और मुख्य सचिव स्तर पर प्रत्येक 10 दिन में इन सभी बड़ी परियोजनाओं की प्रगति की गहन समीक्षा की जाएगी। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश जारी किए कि जिन परियोजनाओं की वर्तमान प्रगति अपेक्षित या तय मानकों से कम पाई गई है, उनके लिए संबंधित विभाग तुरंत एक 'विशेष कार्ययोजना' (स्पेशल एक्शन प्लान) तैयार करें ताकि समय रहते पिछड़ रहे कार्यों में तेजी लाई जा सके।