उत्तराखंड राज्य खाद्य योजना में चार साल बाद गेहूं की वापसी, लाभार्थियों को राहत

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उत्तराखंड में राज्य खाद्य योजना के तहत लाभार्थी परिवारों के लिए राहत भरी खबर है। प्रदेश के साढ़े नौ लाख परिवारों को इस महीने से सरकारी राशन की दुकानों के माध्यम से फिर से पांच किलो गेहूं मिलने लगेगा। अभी तक इन परिवारों को गेहूं के स्थान पर चावल दिया जा रहा था। करीब चार वर्षों बाद राशन व्यवस्था में यह महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। राज्य खाद्य योजना के अंतर्गत प्रत्येक पात्र परिवार को प्रति माह कुल साढ़े सात किलो राशन उपलब्ध कराया जाता है। योजना के अनुसार इसमें पांच किलो गेहूं और ढाई किलो चावल शामिल होते हैं। हालांकि, बीते कुछ वर्षों से गेहूं की उपलब्धता कम होने के कारण लाभार्थियों को गेहूं के बजाय पूरी मात्रा में चावल दिया जा रहा था। इससे कई परिवारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था, क्योंकि पहाड़ी क्षेत्रों में गेहूं को प्राथमिक आहार माना जाता है।

खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के अपर निदेशक पीएस पांगती ने बताया कि इस महीने से स्थिति सामान्य हो गई है और पात्र परिवारों को निर्धारित मात्रा के अनुसार पांच किलो गेहूं और ढाई किलो चावल दिया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभाग की अन्य योजनाओं में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है और सभी योजनाएं पूर्ववत संचालित होंगी। वहीं, इस माह प्रदेश के कई जिलों में राशन की आपूर्ति में देरी भी देखने को मिली, जिससे राशन कार्ड धारकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। इस पर विभाग ने सफाई देते हुए कहा कि फोर्टिफाइड चावल की आपूर्ति प्रक्रिया में कुछ तकनीकी कारणों से विलंब हुआ, जिसके चलते जिलों तक राशन समय पर नहीं पहुंच सका। अपर निदेशक पीएस पांगती के अनुसार, बुधवार तक सभी जिलों में शत प्रतिशत राशन पहुंचा दिया जाएगा और इसके बाद वितरण व्यवस्था पूरी तरह सामान्य हो जाएगी। विभाग ने लाभार्थियों से अपील की है कि वे किसी भी समस्या की स्थिति में संबंधित राशन डीलर या विभागीय अधिकारियों से संपर्क करें। सरकार के इस फैसले से राज्य के लाखों परिवारों को एक बार फिर संतुलित और पारंपरिक खाद्यान्न का लाभ मिलेगा।