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दिल्ली से लौटते ही रेस्क्यू कमान संभालने पहुंचे धामी, 179 ट्रैकर्स-पर्वतारोहियों की सुरक्षित वापसी पर जोर

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उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में भीषण ठंड, बर्फबारी और विषम भौगोलिक परिस्थितियों के बीच फंसे पर्वतारोहियों एवं ट्रैकर्स को बचाने के लिए राज्य सरकार ने पूरी ताकत झोंक दी है। दिल्ली प्रवास से देहरादून लौटते ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बिना किसी विलंब के सीधे राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र  पहुंचे। उन्होंने उच्च हिमालयी ट्रैकिंग मार्गों पर फंसे ट्रैकर्स और माउंटेनियर्स को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए चलाए जा रहे व्यापक राहत एवं बचाव अभियान की उच्चस्तरीय समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि प्राकृतिक आपदा और कठिन मौसम के बीच फंसे प्रत्येक नागरिक की सुरक्षित वापसी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में खराब मौसम और बर्फबारी के बीच फंसे ट्रैकर्स और पर्वतारोहियों को सुरक्षित निकालने के लिए रेस्क्यू अभियान तेज कर दिया गया है। दिल्ली प्रवास से लौटते ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सोमवार को सीधे राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र पहुंचे और राहत एवं बचाव अभियान की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों से फंसे लोगों की लोकेशन, अब तक किए गए रेस्क्यू और शेष लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए की जा रही तैयारियों की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रत्येक ट्रैकर, पर्वतारोही और पोर्टर की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। राज्य में उच्च हिमालयी क्षेत्रों में हाई एल्टीट्यूड ट्रैकिंग और पर्वतारोहण के दौरान कुल 179 लोगों के फंसे होने की जानकारी सामने आई है। इनमें 136 लोग उत्तरकाशी और 43 लोग बागेश्वर के पिंडारी क्षेत्र में हैं। ये लोग अलग-अलग ट्रैकिंग और पर्वतारोहण दलों से जुड़े हैं। आकाशवाणी के अनुसार दोनों जिलों में 13 ट्रैकिंग समूह प्रभावित हैं और मौसम में सुधार के साथ हवाई रेस्क्यू अभियान चलाया जा रहा है। उत्तरकाशी में फंसे लोगों में हाई एल्टीट्यूड एक्सपीडिशन के 89 सदस्य, कालिंदी पास बेस कैंप के 18 और औडेन कॉल पास बेस कैंप के 29 सदस्य शामिल बताए गए हैं। अलग-अलग पर्वतारोहण दल माउंट सुदर्शन, भागीरथी-II, जोगिन-I, शिवलिंग, सतोपंथ और श्रीकंठ पीक जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अभियान पर थे। मौसम में सुधार के बाद सोमवार को हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू अभियान शुरू किया गया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार कालिंदी और औडेन कॉल क्षेत्र से लोगों को निकालने की कार्रवाई की गई है। कुछ लोगों को सुरक्षित बेस तक पहुंचाया जा चुका है और अन्य लोगों की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त हवाई संसाधनों की तत्काल व्यवस्था की जाए। रेस्क्यू अभियान के लिए आठ हेलीकॉप्टर उपलब्ध कराए जाने की जानकारी दी गई है। साथ ही हेली एंबुलेंस को स्टैंडबाय पर रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी ट्रैकर या पर्वतारोही की तबीयत बिगड़ने पर उसे तत्काल चिकित्सा सहायता दी जा सके। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि खराब मौसम और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए सभी संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखा जाए। रेस्क्यू में शामिल हेलीकॉप्टरों में संचार व्यवस्था को मजबूत रखने के लिए सैटेलाइट फोन की व्यवस्था पर भी जोर दिया गया है। उच्च हिमालय में मौसम तेजी से बदलने के कारण रेस्क्यू अभियान के सामने चुनौती बनी हुई है। मौसम अनुकूल होते ही हवाई अभियान तेज किया जा रहा है। जिला प्रशासन, वन विभाग, एसडीआरएफ, पुलिस और आपदा प्रबंधन की टीमें संयुक्त रूप से अभियान में लगी हैं। प्रशासन की ओर से ट्रैकर्स के संपर्क में रहने और उनकी लोकेशन तथा स्वास्थ्य की लगातार निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारी उत्तरकाशी से भी फोन पर बात कर मौके की स्थिति की जानकारी ली। अधिकारियों ने बताया कि शेष लोगों को मौसम और परिस्थितियों को देखते हुए सुरक्षित निकालने की योजना के अनुसार अभियान जारी रहेगा। रेस्क्यू अभियान की समीक्षा के साथ मुख्यमंत्री ने चारधाम यात्रा की वर्तमान व्यवस्थाओं की भी जानकारी ली। उन्होंने यात्रा मार्गों पर श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा, स्वच्छता और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं में लगातार सुधार के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की धार्मिक और प्राकृतिक विरासत को सुरक्षित रखते हुए यात्रा और पर्यटन को अधिक व्यवस्थित तथा टिकाऊ बनाना जरूरी है। उच्च हिमालय में चल रहा यह रेस्क्यू अभियान एक बार फिर बताता है कि पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम की अनिश्चितता के बीच ट्रैकिंग और पर्वतारोहण के दौरान प्रशासनिक निगरानी, समय पर सूचना और आपातकालीन तैयारी कितनी महत्वपूर्ण है। फिलहाल प्राथमिकता सभी फंसे लोगों को मौसम की अनुकूल खिड़की का उपयोग करते हुए सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की है।