गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिल्ली में कांग्रेस पार्टी द्वारा लगातार किए जा रहे विरोध-प्रदर्शनों और राहुल गांधी के नेतृत्व में निकाले जा रहे मार्च को लेकर तीखा हमला बोला है। सीएम योगी ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि कांग्रेस देश के अंदर अराजकता फैलाना बंद करे, क्योंकि जनता की भावनाओं और लोकतांत्रिक व्यवस्था के साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
राहुल गांधी के नेतृत्व में चुनाव आयोग के खिलाफ प्रस्तावित मार्च को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कांग्रेस को नसीहत देते हुए कहा कि देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी को अराजकता का रास्ता छोड़कर लोकतांत्रिक मर्यादाओं का सम्मान करना चाहिए। जनता की भावनाओं से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि यदि कांग्रेस ने अपना रवैया नहीं बदला तो वह अपना बचा-खुचा राजनीतिक जनाधार भी गंवा सकती है। गोरखनाथ मंदिर में सोमवार को मीडिया से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने कांग्रेस के विरोध-प्रदर्शनों और संवैधानिक संस्थाओं पर उठाए जा रहे सवालों को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस अपनी राजनीतिक विफलताओं को छिपाने के लिए लोकतंत्र, जनभावनाओं और चुनी हुई सरकारों के खिलाफ अस्थिरता का माहौल बनाने का प्रयास कर रही है। हालांकि, ये मुख्यमंत्री के राजनीतिक आरोप हैं, जिन पर कांग्रेस का पक्ष भी महत्वपूर्ण है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर लगातार सवाल उठाए हैं। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और कथित वोट चोरी के आरोपों को लेकर विपक्षी दल विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी क्रम में सोमवार को उच्चतम न्यायालय तक मार्च का आह्वान किया गया, जिसमें विपक्षी गठबंधन के अन्य दलों के शामिल होने की बात कही गई। इस मार्च से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी और उसके सहयोगी दल जिस तरह का राजनीतिक आचरण कर रहे हैं, उसे पूरा देश देख रहा है। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व को आत्ममंथन करने की सलाह दी और सवाल उठाया कि जनता बार-बार पार्टी को क्यों नकार रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली में लगातार हो रहे विरोध-प्रदर्शनों से आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और अव्यवस्था की स्थिति पैदा हो रही है। उन्होंने कांग्रेस से अपील की कि वह विरोध के दौरान लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन करे और जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करे। मुख्यमंत्री ने चुनाव प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं को लेकर कांग्रेस के रुख पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस चुनाव जीतने पर परिणाम का श्रेय लेती है, लेकिन हारने पर इलेक्ट्रॉनिक मतदान मशीनों और चुनाव आयोग पर सवाल खड़े करती है। योगी ने न्यायपालिका का उल्लेख करते हुए कहा कि जब न्यायालय गुण-दोष के आधार पर कोई फैसला देता है, तब भी कांग्रेस की ओर से न्यायालय को कटघरे में खड़ा करने का प्रयास किया जाता है। उनके मुताबिक, संवैधानिक संस्थाओं पर लगातार सवाल उठाने से लोकतांत्रिक व्यवस्था को नुकसान पहुंच सकता है। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस को सलाह दी कि वह संस्थाओं पर आरोप लगाने के बजाय तथ्यों और मुद्दों के आधार पर अपनी बात रखे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असहमति और विरोध का अधिकार महत्वपूर्ण है, लेकिन राजनीतिक दलों को अपनी जिम्मेदारी और मर्यादा का भी ध्यान रखना चाहिए। योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस के राजनीतिक प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में वर्ष 1985 के बाद से पार्टी सत्ता में वापसी नहीं कर सकी है। उन्होंने इसे जनता के बदलते राजनीतिक रुख से जोड़ते हुए कांग्रेस नेतृत्व को अपनी रणनीति और कार्यशैली पर विचार करने की सलाह दी। मुख्यमंत्री ने भ्रष्टाचार के आरोपों का हवाला देते हुए कांग्रेस नेतृत्व पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जिस नेतृत्व ने जनता का विश्वास खो दिया है, उसे अपने बारे में गंभीरता से विचार करना चाहिए। उनके अनुसार, जनता और युवा जागरूक हैं और उन्हें लगातार विरोध-प्रदर्शनों के जरिए लंबे समय तक गुमराह नहीं किया जा सकता। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस से अराजकता का रास्ता छोड़कर जनहित के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि स्वस्थ लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करना देश और जनता दोनों के हित में है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग की निष्पक्षता, मतदाता सूची के पुनरीक्षण और कथित वोट चोरी जैसे मुद्दों पर विपक्ष के सवाल भी राजनीतिक बहस के केंद्र में हैं। ऐसे में पूरे विवाद का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि आरोपों और जवाबों के बीच तथ्यों, पारदर्शिता और संवैधानिक प्रक्रियाओं पर चर्चा आगे बढ़े। फिलहाल, राहुल गांधी के मार्च से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस बयान ने कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक टकराव को और तेज कर दिया है। अब निगाहें विपक्ष के अगले कदम और चुनाव प्रक्रिया को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर होने वाली राजनीतिक प्रतिक्रिया पर रहेंगी।

