देहरादून। पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में लगातार बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। इस वैश्विक संकट का असर भारतीय घरेलू बाजार पर न पड़े, इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देशवासियों से ऊर्जा संसाधनों का सीमित और समझदारी से इस्तेमाल करने की विशेष अपील की है। पेट्रोल-डीजल की खपत कम होने से न सिर्फ देश की मूल्यवान विदेशी मुद्रा की बचत होगी, बल्कि आम जनता के पैसों की बचत के साथ-साथ पर्यावरण को भी भारी फायदा पहुंचेगा। इसी राष्ट्रीय मुहिम को आगे बढ़ाते हुए उत्तराखंड परिवहन विभाग ने वाहन चालकों के लिए बेहद व्यावहारिक और असरदार दिशा-निर्देश (गाइडलाइंस) जारी किए हैं। इन आसान तरीकों को अपनी रोजाना की ड्राइविंग आदत में शामिल करके आप अपनी गाड़ी का माइलेज 10 से 24 प्रतिशत तक बढ़ा सकते हैं और अपनी जेब पर पड़ने वाले बोझ को बेहद कम कर सकते हैं।
परिवहन विभाग के तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, गाड़ी चलाने का तरीका (ड्राइविंग पैटर्न) सीधे तौर पर ईंधन की खपत को तय करता है। विभाग ने कुछ मुख्य आदतों में सुधार की सलाह दी है। कई चालकों की आदत होती है कि वे अचानक एक्सीलेटर दबाते हैं और फिर अचानक जोर से ब्रेक मारते हैं। इस प्रक्रिया में इंजन पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और ईंधन की भारी बर्बादी होती है। हमेशा एक्सीलेटर को धीरे-धीरे और सुगमता से दबाएं। सड़क के ढलान और वाहन की गति के अनुसार ही गियर बदलें। बहुत कम गति में हाई गियर लगाना या बहुत तेज गति में लो गियर में गाड़ी दौड़ाना इंजन पर सीधा दबाव डालता है, जिससे तेल पानी की तरह बहता है। बार-बार क्लच दबाने की आदत से भी बचें। यदि किसी ट्रैफिक सिग्नल या जाम में आपको 30 सेकंड से अधिक समय तक रुकना पड़े, तो तुरंत गाड़ी का इंजन बंद कर दें। केवल इस एक आदत से महीने भर में भारी मात्रा में ईंधन बचाया जा सकता है। कार का एसी सीधे तौर पर इंजन की शक्ति का उपयोग करता है, जिससे पहियों को मिलने वाली पावर कम हो जाती है और ईंधन की खपत काफी बढ़ जाती है। अनावश्यक रूप से एसी न चलाएं। जब एसी ऑन हो, तो कार की खिड़कियां पूरी तरह बंद रखें और ब्लोअर (पंखे) की गति को कम पर रखें। परिवहन विभाग की गाइडलाइन में बताया गया है कि टायरों में हवा का कम दबाव (लो टायर प्रेशर) सीधे तौर पर ईंधन की खपत को 5 से 10 फीसदी तक बढ़ा देता है। हवा कम होने से टायरों का सड़क के साथ घर्षण (Friction) बढ़ जाता है और गाड़ी की रफ्तार व संतुलन बनाए रखने के लिए इंजन को दोगुना जोर लगाना पड़ता है। इसलिए हफ्ते में कम से कम एक बार टायर प्रेशर जरूर चेक कराएं। इसके साथ ही, अपनी कार के बूट स्पेस (डिग्गी) को फालतू के सामान से मुक्त रखें। वाहन में रखा हर 50 किलो अतिरिक्त वजन आपकी गाड़ी के ईंधन की खपत को 2 प्रतिशत तक बढ़ा देता है। जितना हल्का वाहन होगा, इंजन पर उतना ही कम लोड पड़ेगा।
आजकल की आधुनिक और ऑटोमेटिक गाड़ियों में 'क्रूज़ कंट्रोल' का फीचर आता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, हाईवे या एक्सप्रेस-वे जैसी साफ और सीधी सड़कों पर क्रूज़ कंट्रोल का उपयोग करने से गाड़ी का माइलेज 10 प्रतिशत तक सुधर जाता है। यह गाड़ी की गति को एक समान बनाए रखता है जिससे फ्यूल वेस्ट नहीं होता। हालांकि, विभाग ने सख्त चेतावनी दी है कि पहाड़ी और घुमावदार रास्तों पर यात्रा के दौरान क्रूज़ कंट्रोल का उपयोग भूलकर भी न करें, यह खतरनाक होने के साथ-साथ ईंधन भी ज्यादा खर्च कराएगा। इसके अलावा, अत्यधिक ट्रैफिक और जाम वाले समय में यात्रा करने से बचें। जीपीएस का इस्तेमाल कर हमेशा सबसे छोटे और साफ रास्तों का चयन करें, क्योंकि बार-बार क्लच-ब्रेक के इस्तेमाल वाले रूट तेल को सबसे तेजी से खत्म करते हैं। गंदा एयर फिल्टर, पुराना इंजन ऑयल और खराब स्पार्क प्लग किसी भी वाहन के परफॉर्मेंस को पूरी तरह डैमेज कर देते हैं। समय पर गाड़ी की सर्विसिंग न कराने से इंजन कमजोर होने लगता है और वह समान दूरी तय करने के लिए ज्यादा तेल सोखता है। नियमित रूप से फिल्टर साफ रखें और समय पर इंजन ऑयल बदलवाते रहें। परिवहन विभाग ने सामाजिक स्तर पर 'कार पूलिंग' को बढ़ावा देने की बात कही है। जब एक ही दिशा या दफ्तर जाने वाले कई लोग अलग-अलग गाड़ियों के बजाय एक ही निजी कार में सफर करते हैं, तो उसे कार पूलिंग कहते हैं। इससे ईंधन की बचत के साथ-साथ सड़कों पर वाहनों की संख्या घटती है। इसके अतिरिक्त, लंबी दूरी के लिए बस, मेट्रो और ट्रेन जैसे पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग सबसे प्रभावी तरीका है। वहीं, कम दूरी (1-2 किलोमीटर) के बाजारों या कामों के लिए निजी वाहनों को घर पर छोड़कर पैदल चलने या साइकिल का उपयोग करने की आदत डालें। यह न केवल देश का तेल और आपका पैसा बचाएगा, बल्कि आपके स्वास्थ्य को भी जीवनभर तंदुरुस्त रखेगा।

