देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उत्तराखंड के अशासकीय स्कूलों के शिक्षकों की एक लंबित मांग को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। अशासकीय माध्यमिक एवं जूनियर हाईस्कूलों में कार्यरत शिक्षकों की पुरानी वित्त विहीन सेवाओं को जोड़कर उन्हें चयन, प्रोन्नत वेतनमान और पुरानी पेंशन का लाभ देने के मामले में मंत्रिमंडल की उप समिति गठित करने का फैसला लिया गया है। कैबिनेट ने इस संबंध में प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। गठित होने वाली उप समिति न्यायालय के पिछले निर्णयों का विस्तृत अध्ययन कर सरकार को अपनी सिफारिश रिपोर्ट सौंपेगी। इस रिपोर्ट के आधार पर सरकार आगे की कार्यवाही तय करेगी।
अशासकीय स्कूलों में कार्यरत शिक्षक लंबे समय से अपनी वित्त विहीन सेवाओं को जोड़ने की मांग कर रहे हैं। वे चाहते हैं कि इन सेवाओं को गिनते हुए उन्हें चयन के समय लाभ, प्रोन्नत वेतनमान और पुरानी पेंशन योजना का फायदा दिया जाए। पूर्व में कई शिक्षकों ने इस मामले को लेकर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। न्यायालय के आदेश के बाद कुछ शिक्षकों को इस लाभ से जोड़ा गया, लेकिन कई अन्य शिक्षक इससे वंचित रह गए। अशासकीय माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रांतीय महामंत्री महादेव मैठाणी ने कहा कि संगठन पिछले कई वर्षों से लगातार इस मांग को उठा रहा है। उन्होंने मांग की कि सभी शिक्षकों की वित्त विहीन सेवाओं को समान रूप से जोड़ा जाए ताकि कोई भी शिक्षक भेदभाव का शिकार न हो। संगठन की अन्य प्रमुख मांगें भी शामिल हैं। इसमें लंबे समय से तदर्थ रूप से कार्यरत शिक्षकों को नियमित करने, मानदेय प्राप्त पीटीए शिक्षकों को तदर्थ नियुक्ति देने और बिना मानदेय के कार्यरत शिक्षकों को मानदेय श्रेणी में लाने की मांग प्रमुख है। शिक्षक संघ का कहना है कि ये शिक्षक वर्षों से अशासकीय स्कूलों में सेवा दे रहे हैं, लेकिन उन्हें उचित वेतनमान और सेवा सुरक्षा नहीं मिल पा रही है। शिक्षकों की इस मांग को लेकर राज्य में पिछले कई वर्षों से चर्चा चल रही थी। कई बार शिक्षक संगठनों ने इस मुद्दे पर सरकार का ध्यान आकर्षित किया था। अब धामी कैबिनेट द्वारा उप समिति गठित करने का फैसला शिक्षकों के बीच उम्मीद जगाने वाला माना जा रहा है। शिक्षा विभाग के अधिकारी मानते हैं कि उप समिति के गठन से मामले का समग्र अध्ययन हो सकेगा। न्यायालय के फैसलों, वित्तीय प्रभाव और प्रशासनिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए एक ठोस सिफारिश तैयार की जाएगी। इससे न केवल शिक्षकों की सेवा शर्तों में सुधार होगा, बल्कि अशासकीय स्कूलों की गुणवत्ता भी बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। माना जा रहा है कि उप समिति अपनी रिपोर्ट शीघ्र तैयार कर कैबिनेट के समक्ष रखेगी। यदि रिपोर्ट सकारात्मक रही तो हजारों अशासकीय शिक्षकों को पुरानी सेवाओं का लाभ मिलने का रास्ता साफ हो जाएगा। यह फैसला राज्य के शिक्षा क्षेत्र में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है। धामी सरकार का यह निर्णय शिक्षकों के हितों को प्राथमिकता देने और लंबित मुद्दों के समाधान की दिशा में सकारात्मक प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

