मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पूर्व सैनिकों और अग्निवीरों के लिए दस प्रतिशत कोटा वाली वीर उद्यमी योजना शुरू की।

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देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने पूर्व सैनिकों और अग्निपथ योजना के तहत चार साल की सेवा पूरी कर लौटने वाले अग्निवीरों को स्वरोजगार स्थापित करने के लिए बड़ी राहत दी है। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना 2.0 के तहत इनके लिए 10 प्रतिशत कोटा आरक्षित कर दिया गया है। साथ ही इनकी परियोजनाओं पर अतिरिक्त सब्सिडी का प्रावधान किया गया है। इस नई पहल को ‘वीर उद्यमी योजना’ नाम दिया गया है, जिससे प्रदेश के हजारों पूर्व सैनिकों और अग्निवीरों को अपना व्यवसाय शुरू करने में सरकारी सहयोग मिलेगा।

कैबिनेट की हालिया बैठक में लिए गए इस फैसले के अनुसार, मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना 2.0 के वार्षिक लक्ष्य में पूर्व सैनिकों व अग्निवीरों के लिए 10 प्रतिशत कोटा आरक्षित रहेगा। विनिर्माण क्षेत्र और अन्य व्यवसायों में इन्हें अतिरिक्त सब्सिडी दी जाएगी। योजना के तहत वर्ष 2030 तक कुल लगभग 6.84 करोड़ रुपये का व्यय होने का अनुमान है। सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई पूर्व सैनिक या अग्निवीर 10 से 20 लाख रुपये तक का स्वरोजगार प्रोजेक्ट शुरू करता है, तो पर्वतीय क्षेत्रों में 20 प्रतिशत और मैदानी क्षेत्रों में 15 प्रतिशत सब्सिडी मिलेगी। इसके अलावा इन सभी को 5 प्रतिशत अतिरिक्त सब्सिडी बूस्टर के रूप में दी जाएगी। इस प्रकार कुल सब्सिडी की राशि काफी आकर्षक हो गई है। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना 2.0 में सरकार का सालाना लक्ष्य 10 हजार लोगों को स्वरोजगार से जोड़ने का है। योजना के अंतर्गत कोई भी व्यवसाय शुरू किया जा सकता है। पूंजी निवेश के आधार पर सब्सिडी निर्धारित है। पर्वतीय क्षेत्रों में 2 लाख रुपये निवेश पर 30 प्रतिशत, 2 से 10 लाख पर 25 प्रतिशत और 10 से 20 लाख पर 20 प्रतिशत सब्सिडी दी जाती है। पूर्व सैनिकों व अग्निवीरों को इस पर अतिरिक्त 5 प्रतिशत बूस्टर सब्सिडी मिलेगी। योजना के अंतर्गत सब्जी-फल विक्रेता, फास्ट फूड, चाय-पकौड़े, ब्रेड-अंडे की बिक्री, प्लम्बर, टेलर, मोबाइल रिपेयर, ब्यूटी पार्लर, सिलाई-बुनाई, एम्ब्रॉयडरी, बुक बाइंडिंग, स्क्रीन प्रिंटिंग, पेपर बैग निर्माण, धूप-अगरबत्ती, रिंगाल कार्य, कैंडल मेकिंग, मशरूम खेती, डेयरी, कार वॉशिंग, बेकरी, कारपेंट्री, लौहारगिरी जैसे सूक्ष्म एवं लघु व्यवसाय शुरू किए जा सकते हैं।

वित्तीय वर्षवार अनुदान का अनुमान इस प्रकार है (लाख रुपये में):
2026-27 — 146.55
2027-28 — 162.83
2028-29 — 179.12
2029-30 — 195.40

यह फैसला उन पूर्व सैनिकों और अग्निवीरों के लिए बड़ी राहत है, जो राष्ट्र सेवा के बाद आत्मनिर्भर बनना चाहते हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार का यह कदम न केवल पलायन रोकने और रिवर्स माइग्रेशन को बढ़ावा देने में मदद करेगा, बल्कि राज्य में स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन को भी नई गति देगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस योजना से पूर्व सैनिकों का कौशल और अनुशासन स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाएगा। उत्तराखंड सरकार का यह निर्णय ‘आत्मनिर्भर उत्तराखंड’ के संकल्प को मजबूत करता है और सैन्य पृष्ठभूमि वाले युवाओं को सम्मानजनक स्वरोजगार का अवसर प्रदान करता है।