उत्तराखंड में 18 साल में 560 पहुंचे बाघ, स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स की भर्ती अब भी अधूरी

Blog
 Image

देहरादून। उत्तराखंड में पिछले 18 वर्षों के दौरान बाघों की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2008 में जहां राज्य में केवल 178 बाघ थे, वहीं 2022 की गणना में यह संख्या बढ़कर 560 तक पहुंच गई। खास बात यह है कि अकेले कार्बेट टाइगर रिजर्व में ही 260 बाघ पाए गए हैं। बाघों की इस सफलता कहानी के बीच एक गंभीर सवाल भी खड़ा हो गया है—इनकी सुरक्षा के लिए प्रस्तावित स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स (एसटीपीएफ) अब तक कागजों से बाहर नहीं निकल सकी है।

नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) ने वर्ष 2008-09 में देश के प्रमुख टाइगर रिजर्वों में बाघों को शिकारियों से बचाने और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के उद्देश्य से एसटीपीएफ के गठन का निर्णय लिया था। इस योजना के तहत उत्तराखंड के कार्बेट टाइगर रिजर्व, उत्तर प्रदेश के दुधवा और राजस्थान के रणथंभौर में विशेष सुरक्षा बल गठित किया जाना था। इसके लिए एनटीसीए की ओर से वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की गई थी। हालांकि, उत्तराखंड में स्थिति यह है कि कार्बेट के लिए स्वीकृत 81 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया आज तक पूरी नहीं हो पाई। करीब 18 वर्ष बीत जाने के बावजूद एक भी कर्मचारी की नियुक्ति नहीं हो सकी है। इस दौरान बाघों की संख्या लगातार बढ़ती रही, लेकिन उनकी सुरक्षा के लिए विशेष बल का गठन अधूरा ही बना रहा। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, एसटीपीएफ भर्ती के लिए अधियाचन पिछले वर्ष ही उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूकेएसएसएससी) को भेज दिया गया था। आयोग की ओर से कुछ अतिरिक्त जानकारियां मांगी गई थीं, जिन्हें विभाग ने उपलब्ध करा दिया है। मुख्य वन संरक्षक (मानव संसाधन) प्रसन्न पात्रो ने बताया कि भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक सूचनाएं आयोग को भेज दी गई हैं और विभाग इस दिशा में लगातार प्रयासरत है। जानकारों का कहना है कि यह मामला केवल भर्ती में देरी का नहीं, बल्कि वन विभाग की प्रशासनिक सुस्ती का भी प्रतीक बन गया है। पिछले 18 वर्षों में विभाग में 17 प्रमुख वन संरक्षक (हॉफ) बदल चुके हैं। इसके अलावा कई अधिकारी प्रमुख वन संरक्षक (वन्यजीव) और मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक के पदों पर आए और गए, लेकिन एसटीपीएफ का गठन किसी भी कार्यकाल में पूरा नहीं हो सका। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि बाघों की संख्या बढ़ना संरक्षण प्रयासों की सफलता का संकेत है, लेकिन इसके साथ सुरक्षा तंत्र को भी उतना ही मजबूत करना आवश्यक है। कार्बेट टाइगर रिजर्व देश के सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण बाघ आवासों में माना जाता है। यहां शिकार, अवैध वन कटान, मानव-वन्यजीव संघर्ष और सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी जैसी चुनौतियां लगातार बनी रहती हैं। ऐसे में प्रशिक्षित और समर्पित विशेष सुरक्षा बल की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही है। राज्य में बाघों की संख्या 178 से बढ़कर 560 होना निश्चित रूप से उत्तराखंड के लिए गर्व की बात है, लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यदि सुरक्षा ढांचा समय रहते मजबूत नहीं किया गया तो भविष्य में यह सफलता चुनौती में भी बदल सकती है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि वर्षों से लंबित एसटीपीएफ भर्ती प्रक्रिया आखिर कब पूरी होती है और बाघों को वह विशेष सुरक्षा कब मिलती है, जिसकी योजना लगभग दो दशक पहले बनाई गई थी।