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उत्तराखंड में 1 से 8 अक्टूबर तक 'वन्यजीव सप्ताह': मानव-वन्यजीव संघर्ष वाले क्षेत्रों पर विशेष फोकस,अदम्य साहस दिखाने वाले और वनकर्मी होंगे सम्मानित

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देहरादून। प्रकृति और जैव विविधता के लिए समृद्ध उत्तराखंड में आगामी 1 से 8 अक्टूबर तक 'राष्ट्रीय वन्यजीव सप्ताह' का आयोजन होने जा रहा है। इस वर्ष का वन्यजीव सप्ताह केवल औपचारिक आयोजनों तक सीमित न रहकर सीधे धरातल पर मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने और स्थानीय समुदायों के साथ संवाद मजबूत करने पर केंद्रित रहेगा। इस वर्ष भारत सरकार द्वारा तय की गई मुख्य थीम आवासों को जोड़ना, फलता-फूलता वन्यजीव है। इसके तहत आम जनता को वन्यजीवों, उनके प्राकृतिक आवासों और उनके संरक्षण के महत्व से जोड़ते हुए सह-अस्तित्व की भावना विकसित करने का प्रयास किया जाएगा।

उत्तराखंड में मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती चुनौतियों के बीच इस बार वन्यजीव सप्ताह को जागरूकता और जनभागीदारी से जोड़ने की तैयारी है। प्रदेश में 1 से 8 अक्टूबर तक वन्यजीव सप्ताह मनाया जाएगा। इस दौरान उन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जहां मानव और वन्यजीवों के बीच संघर्ष की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं। वन विभाग स्थानीय लोगों के साथ संवाद मजबूत करने के साथ ही उन्हें वन्यजीवों के व्यवहार, प्राकृतिक आवास और संघर्ष से बचाव के उपायों की जानकारी देगा। इस वर्ष वन्यजीव सप्ताह की थीम पर्यावासों को जोड़ना, वन्यजीवों का फलना-फूलना यानी ‘आवासों को जोड़ना, फलता-फूलता वन्यजीव’ रखी गई है। थीम के माध्यम से वन्यजीवों और उनके प्राकृतिक आवास के बीच संबंध को समझाने तथा जैव विविधता के संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया जाएगा। वन विभाग का जोर इस बात पर रहेगा कि वन्यजीव संरक्षण के साथ स्थानीय आबादी की सुरक्षा और जरूरतों को भी प्राथमिकता दी जाए। वन्यजीव सप्ताह के दौरान ऐसे इलाकों में विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जहां वन्यजीवों की आवाजाही के कारण लोगों को खतरे का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों को वन्यजीवों के व्यवहार, उनके प्राकृतिक आवास और आमना-सामना होने की स्थिति में बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में बताया जाएगा। मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए स्थानीय लोगों की भागीदारी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वन विभाग का प्रयास रहेगा कि लोगों और वन्यजीवों के बीच टकराव की स्थितियों को समझते हुए बचाव के उपायों के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाए। इसके साथ ही वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों के संरक्षण और उनके बीच संपर्क बनाए रखने के महत्व पर भी जानकारी दी जाएगी। वन्यजीव सप्ताह के तहत प्रदेशभर में विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम आयोजित होंगे। इनमें स्कूली बच्चों, स्वयंसेवी संस्थाओं (एनजीओ), सामाजिक संगठनों और अन्य सरकारी विभागों की भागीदारी रहेगी। बच्चों को वन्यजीवों, जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति संवेदनशील बनाने के लिए विशेष गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। वन विभाग के साथ विभिन्न संस्थाएं भी संरक्षण और जनजागरूकता से जुड़ी गतिविधियों में सहयोग करेंगी। इन कार्यक्रमों के जरिए लोगों को यह समझाने का प्रयास किया जाएगा कि वन्यजीवों का संरक्षण केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक भागीदारी से जुड़ा विषय है। वन्यजीव सप्ताह के दौरान मानव-वन्यजीव संघर्ष की परिस्थितियों में अदम्य साहस दिखाने वाले लोगों के साथ-साथ वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले वनकर्मियों को सम्मानित किया जाएगा। इससे संरक्षण कार्यों में योगदान देने वाले लोगों का उत्साह बढ़ाने और उनके प्रयासों को पहचान देने की कोशिश होगी। वाइल्डलाइफ एपीसीसीएफ विवेक पांडे के अनुसार, इस बार वन्यजीव सप्ताह में मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए स्थानीय लोगों के साथ संवाद बढ़ाने पर विशेष जोर रहेगा। वहीं, राजाजी टाइगर रिजर्व के निदेशक कोको रोसे की ओर से भी वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विषयों पर विचार रखे जाने की बात कही गई है। वन्यजीव सप्ताह का उद्देश्य केवल औपचारिक आयोजन करना नहीं, बल्कि संरक्षण के प्रति जनभागीदारी बढ़ाना और संघर्ष की घटनाओं को कम करने के लिए जागरूकता विकसित करना है। अब इन कार्यक्रमों का असर स्थानीय स्तर पर लोगों की सुरक्षा और वन्यजीवों के संरक्षण के बीच बेहतर संतुलन बनाने में कितना मददगार होगा, यह महत्वपूर्ण रहेगा।