हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार स्थित उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय का 12वां दीक्षांत समारोह शनिवार को अत्यंत गरिमामय और भव्य वातावरण में संपन्न हुआ। इस गौरवशाली अवसर पर उत्तराखंड के राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से.नि.) ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। दीक्षांत समारोह में विभिन्न पाठ्यक्रमों के मेधावी छात्र-छात्राओं को उनकी शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए उपाधियां और सम्मान पदक प्रदान कर सम्मानित किया गया, जिससे संपूर्ण परिसर में उत्साह और उल्लास का माहौल देखने को मिला।
उत्तराखंड की समृद्ध संस्कृत परंपरा और उच्च शिक्षा के गौरवपूर्ण अवसर के रूप में उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय, हरिद्वार में बारहवें दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे। राज्यपाल के विश्वविद्यालय परिसर में पहुंचते ही जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन और विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से उनका स्वागत किया गया। कुलपति प्रो. रमाकांत पांडे ने राज्यपाल को पुष्पगुच्छ भेंट कर अभिनंदन किया। राज्यपाल के आगमन को लेकर विश्वविद्यालय परिसर में विशेष तैयारियां की गई थीं। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर ने कुलपति प्रो. रमाकांत पांडे के साथ राज्यपाल का स्वागत किया। इस दौरान विश्वविद्यालय के अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस अधिकारी और अन्य संबंधित लोग मौजूद रहे। बारहवां दीक्षांत समारोह विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं के लिए विशेष महत्व रखता है। समारोह में विभिन्न पाठ्यक्रमों में अध्ययन पूरा करने वाले विद्यार्थियों को उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए उपाधियां प्रदान की जाएंगी। इसके साथ ही उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को विभिन्न सम्मान और पदक से नवाजा जाएगा। दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों के शैक्षणिक जीवन के एक महत्वपूर्ण पड़ाव को रेखांकित करता है, जहां वर्षों की मेहनत के बाद उन्हें औपचारिक रूप से उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों की मान्यता मिलती है। उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय राज्य की संस्कृत शिक्षा और भारतीय ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह केवल उपाधि वितरण तक सीमित नहीं रहता, बल्कि संस्कृत, भारतीय दर्शन, वैदिक अध्ययन और पारंपरिक ज्ञान-विज्ञान की शिक्षा से जुड़े विद्यार्थियों के लिए नई जिम्मेदारियों की शुरुआत का अवसर भी बनता है। समारोह को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से परिसर में विशेष व्यवस्थाएं की गईं। राज्यपाल के आगमन को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को भी प्राथमिकता दी गई। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया और सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित किए। विश्वविद्यालय परिसर में प्रवेश और कार्यक्रम स्थल के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अधिकारियों ने आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। राज्यपाल गुरमीत सिंह के विश्वविद्यालय पहुंचने से समारोह की गरिमा और बढ़ी। प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में विश्वविद्यालय प्रशासन ने कार्यक्रम को व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने की तैयारियां पूरी कीं। समारोह में विद्यार्थियों, शिक्षकों और विश्वविद्यालय से जुड़े अधिकारियों के बीच उत्साह का माहौल देखने को मिला। दीक्षांत समारोह किसी भी विश्वविद्यालय के लिए उपलब्धियों के मूल्यांकन और नई पीढ़ी को भविष्य की जिम्मेदारियों के लिए तैयार करने का महत्वपूर्ण अवसर होता है। उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के बारहवें दीक्षांत समारोह में भी यही भाव दिखाई दिया। उपाधि प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं के लिए यह दिन उनकी शैक्षणिक यात्रा की उपलब्धि के साथ-साथ आगे के जीवन में ज्ञान, संस्कार और जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ने का संदेश लेकर आया। संस्कृत और भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा के साथ जोड़ने की दिशा में ऐसे आयोजन विश्वविद्यालय की भूमिका को रेखांकित करते हैं। दीक्षांत समारोह के मंच से सम्मानित होने वाले विद्यार्थी अब अपनी शिक्षा और ज्ञान को समाज, शिक्षा, शोध और संस्कृति के व्यापक क्षेत्र में आगे ले जाने की जिम्मेदारी के साथ नई यात्रा शुरू करेंगे।

