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हेल्थ सेक्टर में बहार: उत्तराखंड के नर्सिंग युवाओं को मिल रहा वैश्विक मुकाम, जापानी-जर्मन भाषा सीखकर विदेशों में पा रहे रोजगार

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उत्तराखंड में चिकित्सा और नर्सिंग शिक्षा का दायरा लगातार विस्तृत हो रहा है। राज्य सरकार के प्रयासों से न केवल नर्सिंग की पढ़ाई के लिए आधारभूत ढांचा मजबूत हुआ है, बल्कि युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार भी खुले हैं। जुलाई 2021 से लेकर अब तक प्रदेश में तीन नए राजकीय नर्सिंग कॉलेजों की स्थापना की जा चुकी है, जिनके खुलने से विभिन्न पाठ्यक्रमों में 321 सीटों की ऐतिहासिक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके साथ ही सरकारी और निजी संस्थानों को मिलाकर प्रदेश में नर्सिंग की कुल सीटों की संख्या अब बढ़कर 11,495 हो गई है।

प्रदेश में नर्सिंग की पढ़ाई करने वाले युवाओं के लिए अवसरों का दायरा बढ़ा है। नए राजकीय नर्सिंग कॉलेजों की स्थापना, निजी संस्थानों को पाठ्यक्रम संचालन की मंजूरी और शिक्षकों की नियुक्तियों से नर्सिंग शिक्षा को विस्तार देने की दिशा में कदम उठाए गए हैं। जुलाई 2021 से अब तक प्रदेश में तीन नए राजकीय नर्सिंग कॉलेज स्थापित किए गए हैं। इनके माध्यम से विभिन्न पाठ्यक्रमों में 321 सीटें बढ़ी हैं। सरकारी और निजी संस्थानों को मिलाकर प्रदेश में नर्सिंग की कुल सीटों की संख्या अब 11,495 बताई गई है। सरकार का जोर न केवल युवाओं को चिकित्सा क्षेत्र में प्रशिक्षण देने पर है, बल्कि उन्हें देश और विदेश में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने पर भी है। नर्सिंग शिक्षा का विस्तार ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब स्वास्थ्य सेवाओं में प्रशिक्षित नर्सिंग कर्मियों की भूमिका लगातार बढ़ रही है।  नए संस्थानों और बढ़ी हुई सीटों से अधिक युवाओं को इस क्षेत्र में प्रवेश का अवसर मिल सकता है। हालांकि, शिक्षा की गुणवत्ता और पर्याप्त शिक्षकों की उपलब्धता इस विस्तार को प्रभावी बनाने के लिए महत्वपूर्ण रहेगी। जुलाई 2021 के बाद स्थापित तीन नए राजकीय नर्सिंग कॉलेजों में बीएससी नर्सिंग की 151, एमएससी नर्सिंग की 120, एनपीसीसी की 20 और एनपीएम की 30 सीटें बढ़ाई गई हैं। इसके बाद राजकीय नर्सिंग कॉलेजों में विभिन्न पाठ्यक्रमों की कुल सीटें 879 हो गई हैं। इन संस्थानों में एएनएम, जीएनएम, बीएससी नर्सिंग, पोस्ट बेसिक बीएससी नर्सिंग, एमएससी नर्सिंग, एनपीसीसी और एनपीएम जैसे पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इससे विद्यार्थियों को नर्सिंग के अलग-अलग स्तरों पर शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर मिल रहा है। नर्सिंग शिक्षा के विस्तार में निजी संस्थानों की भी अहम भूमिका रही है। जुलाई 2021 के बाद प्रदेश के 76 निजी नर्सिंग संस्थानों को विभिन्न पाठ्यक्रम संचालित करने के लिए अनिवार्यता प्रमाणपत्र जारी किए गए। इन संस्थानों में 5,138 सीटों को मंजूरी दी गई। इसके साथ निजी नर्सिंग संस्थानों में कुल सीटों की संख्या 10,616 तक पहुंच गई है। उत्तराखंड में नर्सिंग की पढ़ाई के लिए प्रदेश के विद्यार्थियों के साथ उत्तर प्रदेश, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, बिहार और पूर्वोत्तर राज्यों से भी विद्यार्थी पहुंच रहे हैं। इससे राज्य नर्सिंग शिक्षा के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में अपनी भूमिका बढ़ा रहा है। नर्सिंग शिक्षा को रोजगार से जोड़ने के लिए विद्यार्थियों को व्यावसायिक प्रशिक्षण के साथ विदेशी भाषाएं भी सिखाई जा रही हैं। इसके तहत जापानी, जर्मन और स्पेनिश भाषाओं का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि विद्यार्थी विदेशों में उपलब्ध रोजगार के अवसरों के लिए अपनी तैयारी बेहतर कर सकें। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वर्ष 2023 में दो बैचों के 60 अभ्यर्थियों को जापान में रोजगार मिला, जबकि वर्ष 2025 में 13 अभ्यर्थियों को जर्मनी में रोजगार प्राप्त हुआ। ये अवसर नर्सिंग विद्यार्थियों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करने की संभावनाएं बढ़ाते हैं। चिकित्सा शिक्षा निदेशक डॉ. आशुतोष सयाना के अनुसार, नर्सिंग शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए शिक्षकों की नियुक्ति और नए पदों के सृजन पर भी काम किया गया है। दिसंबर 2021 में 40 ट्यूटर नियुक्त किए गए, जबकि जून 2025 तक 26 और ट्यूटरों की नियुक्ति हुई। इससे नियमित नर्सिंग ट्यूटरों की संख्या 66 हो गई। अक्तूबर 2022 में आठ असिस्टेंट प्रोफेसर और एक एसोसिएट प्रोफेसर सहित नौ संकाय सदस्यों की नियुक्ति हुई। नवंबर 2025 में सात और संकाय सदस्य नियुक्त किए गए। इसके अलावा, 16 असिस्टेंट प्रोफेसर पदों की अंतिम परीक्षा का परिणाम जारी होने के बाद नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। सितंबर में 30 ट्यूटरों की भर्ती के लिए अधियाचन उत्तराखंड चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड को भेजा गया। नर्सिंग पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए युवाओं का रुझान भी बना हुआ है। हेमवती नंदन बहुगुणा चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षा में हर वर्ष लगभग 12 हजार से 15 हजार अभ्यर्थी आवेदन करते हैं। यह आंकड़ा इस क्षेत्र में युवाओं की रुचि को दर्शाता है। प्रदेश में नर्सिंग सीटों का विस्तार, शिक्षकों की नियुक्ति और विदेशी भाषाओं के प्रशिक्षण जैसी पहलें युवाओं के लिए नए अवसर खोल सकती हैं। अब महत्वपूर्ण यह होगा कि बढ़ती सीटों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण, पर्याप्त शिक्षण व्यवस्था और रोजगार से जुड़ी सुविधाएं लगातार मजबूत की जाएं, ताकि इसका लाभ विद्यार्थियों के साथ उत्तराखंड की स्वास्थ्य सेवाओं को भी मिल सके।