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उत्तराखंड में बिछेगा सड़कों का शानदार जाल: 13 जिलों में बनेंगी 1,479 सड़कें, 1490 दुर्गम गांव होंगे कनेक्ट

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देहरादून। उत्तराखंड के दूरस्थ और दुर्गम पहाड़ी इलाकों की जिंदगी में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना ने नई रफ्तार भर दी है। राज्य के सुदूर क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए प्रदेश के सभी 13 जिलों में सड़कों का वृहद जाल बिछाया जा रहा है। योजना के चौथे चरण के तहत कुल 9,344 किलोमीटर लंबाई की 1,479 सड़कों का निर्माण किया जाएगा, जिससे प्रदेश के 1,490 गांव सीधे सड़क नेटवर्क से जुड़ेंगे।

प्रदेश के दुर्गम और दूरस्थ पहाड़ी गांवों की तस्वीर बदलने की दिशा में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) का विस्तार अब और बड़े स्तर पर होने जा रहा है। पीएमजीएसवाई के चौथे चरण में प्रदेश के सभी 13 जिलों में कुल 1,479 सड़कों का निर्माण प्रस्तावित है। इन सड़कों की कुल लंबाई करीब 9,344 किलोमीटर होगी। योजना के जरिए करीब 1,490 गांवों को सड़क नेटवर्क से जोड़ने की तैयारी है। इससे पहाड़ के दूरस्थ क्षेत्रों में आवागमन आसान होने के साथ कृषि, पर्यटन और स्थानीय कारोबार को भी गति मिलने की उम्मीद है। पीएमजीएसवाई के पहले तीन चरणों में प्रदेश में 11,595 करोड़ रुपये की लागत से 2,826 सड़कों का निर्माण पूरा किया जा चुका है। इन सड़कों की कुल लंबाई 21,915 किलोमीटर है और इससे 1,860 गांवों को सड़क संपर्क का लाभ मिला है। अब योजना चौथे चरण में प्रवेश कर चुकी है, जिसके तहत सड़क नेटवर्क को और व्यापक बनाने पर जोर दिया जा रहा है। पीएमजीएसवाई-4.0 के पहले चक्र में प्रदेश के 309 गांवों को सड़क सुविधा से जोड़ने की योजना है। इसके लिए करीब 1,707 करोड़ रुपये की लागत से 1,228.20 किलोमीटर लंबाई की 184 सड़कों का निर्माण किया जा रहा है। पहले चरण में पौड़ी के सबसे अधिक 68 गांवों को लाभ मिलेगा। इसके अलावा अल्मोड़ा और टिहरी के 47-47, बागेश्वर के 35, पिथौरागढ़ के 25, नैनीताल और उत्तरकाशी के 24-24, चमोली के 17, देहरादून और रुद्रप्रयाग के 10-10 तथा हरिद्वार के दो गांव शामिल हैं। पीएमजीएसवाई के चौथे चरण में पिथौरागढ़ जिले के 249 गांवों को सड़क से जोड़ने के लिए 1,819.6 किलोमीटर सड़क का निर्माण प्रस्तावित है। अल्मोड़ा में 221 गांवों के लिए 1,395.5 किलोमीटर, पौड़ी में 185 गांवों के लिए 1,227.8 किलोमीटर और चमोली में 175 गांवों के लिए 996.15 किलोमीटर सड़क बनाई जाएगी। इसी तरह टिहरी के 168 गांवों के लिए 941.5 किलोमीटर, उत्तरकाशी के 112 गांवों के लिए 721.99 किलोमीटर, रुद्रप्रयाग के 111 गांवों के लिए 469.2 किलोमीटर और बागेश्वर के 101 गांवों के लिए 569.82 किलोमीटर सड़क प्रस्तावित है। नैनीताल में 67 गांवों के लिए 399.55 किलोमीटर, देहरादून में 52 गांवों के लिए 390 किलोमीटर, चंपावत में 39 गांवों के लिए 387.3 किलोमीटर, ऊधमसिंह नगर में नौ गांवों के लिए 22.3 किलोमीटर और हरिद्वार के एक गांव के लिए 3.1 किलोमीटर सड़क का निर्माण किया जाएगा। प्रदेश सरकार का फोकस ऐसे गांवों तक सड़क पहुंचाने पर है, जो अब भी कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण मुख्य सड़क नेटवर्क से दूर हैं। दिसंबर 2025 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात की थी। इसके बाद पीएमजीएसवाई के तहत करीब 1,700 करोड़ रुपये की मंजूरी मिली थी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के अनुसार, प्रदेश सरकार दूरदराज के सभी गांवों को सड़क नेटवर्क से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। सड़क संपर्क बढ़ने से ग्रामीणों के आवागमन की सुविधा बेहतर होने के साथ ही पर्यटन, कृषि और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।