नैनीताल कलेक्ट्रेट में सनसनी: अधिवक्ता ने कार में खुद को मारी गोली, बीमारी से परेशान होकर उठाया खौफनाक कदम

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नैनीताल। सरोवर नगरी नैनीताल के कलेक्ट्रेट परिसर में सोमवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब एक कार के भीतर जाने-माने अधिवक्ता पूरन सिंह भाकुनी का लहूलुहान शव बरामद हुआ। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि डिप्रेशन और लंबी बीमारी से तंग आकर अधिवक्ता ने अपनी ही पिस्टल से खुद को गोली मारकर जीवनलीला समाप्त कर ली। घटनास्थल से एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ है, जो उनके मानसिक तनाव और बीमारी के दर्द को बयां कर रहा है।

जानकारी के अनुसार, अधिवक्ता पूरन सिंह भाकुनी की कार कलेक्ट्रेट पार्किंग में खड़ी थी। अचानक कार के भीतर से गोली चलने की आवाज आई, जिसे सुनकर पार्किंग संचालक और आसपास मौजूद लोग मौके पर दौड़े। जब लोगों ने कार के भीतर झांका, तो अधिवक्ता के सिर पर गोली लगी थी और वे सीट पर बेसुध पड़े थे। आनन-फानन में इसकी सूचना पुलिस और स्थानीय अधिवक्ताओं को दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने जब कार के शीशे से देखा, तो अंदर अधिवक्ता का शव संदिग्ध अवस्था में पड़ा था। पुलिस को कार के डैशबोर्ड से एक सुसाइड नोट बरामद हुआ है। सूत्रों के मुताबिक, नोट में अधिवक्ता ने अपनी गंभीर बीमारी का जिक्र करते हुए लिखा कि वे अब इस शारीरिक और मानसिक कष्ट को और अधिक सहन नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने भावुक होते हुए लिखा, "अब जिंदगी की गाड़ी नहीं खींच पा रहा हूं।" इसके साथ ही उन्होंने प्रशासन (कुमाऊं आयुक्त, डीएम, एसएसपी) से मार्मिक अपील की है कि उनके जाने के बाद उनकी पत्नी का ख्याल रखा जाए, ताकि वे कोई गलत कदम न उठा लें। घटना की गंभीरता को देखते हुए एसपी डॉ. जगदीश चंद्र पुलिस बल और फोरेंसिक टीम के साथ मौके पर पहुंचे। फोरेंसिक टीम ने कार के भीतर से साक्ष्य जुटाए हैं। अधिवक्ता के हाथ में उनकी पिस्टल मौजूद थी। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। एसपी डॉ. जगदीश चंद्र ने बताया कि मामले की हर पहलू से बारीकी से जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और सुसाइड नोट की हैंडराइटिंग की जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी। कलेक्ट्रेट परिसर जैसी सुरक्षित जगह पर हुई इस आत्मघाती घटना से नैनीताल के अधिवक्ता समुदाय और स्थानीय निवासियों में गहरा शोक है। साथियों का कहना है कि वे एक मिलनसार व्यक्तित्व के धनी थे, लेकिन अंदर ही अंदर वे किस बीमारी और तनाव से जूझ रहे थे, इसका अंदाजा किसी को नहीं था। पुलिस अब यह भी जांच रही है कि अधिवक्ता के पास मौजूद हथियार लाइसेंसी था या नहीं और घटना के समय वहां और कौन मौजूद था।