उत्तराखंड बजट 2026-27: चुनावी साल में धामी सरकार का जेंडर बजट पर बड़ा दांव, 2730 करोड़ की बढ़ोतरी

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उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले पेश किए गए वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में धामी सरकार ने महिला सशक्तीकरण पर विशेष फोकस किया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गैरसैंण के भराड़ीसैंण विधानसभा में 1,11,703.21 करोड़ रुपये का बजट पेश करते हुए जेंडर बजट में 2,730.70 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी की घोषणा की। इसके साथ ही जेंडर बजट 16,961.32 करोड़ रुपये से बढ़कर 19,692.02 करोड़ रुपये हो गया है। सरकार का कहना है कि इस बढ़े हुए बजट के माध्यम से महिलाओं के स्वास्थ्य, पोषण, सुरक्षा और स्वरोजगार से जुड़ी योजनाओं को मजबूत किया जाएगा। बजट में विशेष रूप से आंगनबाड़ी सेवाओं और पोषण योजनाओं को प्राथमिकता दी गई है। ‘सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण 2.0’ योजना के तहत करीब 7.33 लाख लाभार्थियों को अनुपूरक पोषाहार उपलब्ध कराने के लिए 598.33 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वहीं प्रधानमंत्री पोषण मिशन के तहत पोषण जागरूकता बढ़ाने के लिए 149.45 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

मातृत्व और शिशु स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए सरकार ने कई योजनाओं में बजट बढ़ाया है। ‘ईजा-बोई शगुन योजना’ के लिए 14.13 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जबकि नवजात शिशु और प्रसूता माताओं की देखभाल के लिए ‘मुख्यमंत्री महालक्ष्मी किट योजना’ को 30 करोड़ रुपये और ‘मुख्यमंत्री बाल पोषण योजना’ को 25 करोड़ रुपये दिए गए हैं। महिलाओं की सुरक्षा के लिए भी बजट में विशेष प्रावधान किए गए हैं। ‘निर्भया फंड’ के तहत 112.02 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जिससे प्रदेश में महिला सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं को और मजबूत किया जाएगा। इसके अलावा सामाजिक सुरक्षा के तहत निराश्रित विधवाओं की पुत्रियों के विवाह के लिए 5 करोड़ रुपये का अनुदान भी रखा गया है। बजट में ‘मुख्यमंत्री आंचल अमृत योजना’ और ‘वात्सल्य योजना’ के लिए 15-15 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वहीं ‘मुख्यमंत्री महिला पोषण योजना’ के लिए 13.44 करोड़ रुपये और ‘मुख्यमंत्री बाल एवं महिला बहुमुखी विकास निधि’ के लिए 8 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। आपदा के समय महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से ‘आपदा सखी’ योजना के लिए 2 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। राज्य सरकार का मानना है कि जेंडर बजट में यह बढ़ोतरी महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। विशेषज्ञों के अनुसार चुनावी साल में सरकार का यह कदम आधी आबादी को साधने की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है।