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जाते-जाते खूब भीगोएगा मानसून: उत्तराखंड में अगले 2-3 दिन भारी बारिश का ‘येलो अलर्ट’,कई 10 जिलों में बढ़ेगी आफत

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देहरादून। उत्तराखंड से मानसून की विदाई का समय भले ही नजदीक आ रहा हो, लेकिन विदा होने से पहले मौसम एक बार फिर अपना रौद्र रूप दिखाने के लिए तैयार है। मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून ने राज्य में मानसून की विदाई से पहले बारिश का दौर तेज होने के आसार जताए हैं। विभाग ने अगले दो से तीन दिनों के दौरान राज्य के पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में मूसलाधार बारिश की चेतावनी जारी करते हुए प्रदेशभर के 10 जिलों में 'येलो अलर्ट' जारी किया है।

मानसून की विदाई से पहले मौसम एक बार फिर करवट लेने जा रहा है। राज्य के कई हिस्सों में अगले दो से तीन दिनों तक बारिश का दौर तेज होने की संभावना है। मौसम विभाग ने देहरादून, हरिद्वार समेत पहाड़ी जिलों में कहीं-कहीं तेज बारिश को लेकर येलो अलर्ट जारी किया है। बारिश के साथ पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन, सड़कें अवरुद्ध होने और बरसाती नदियों-नालों का जलस्तर बढ़ने का खतरा भी बना रहेगा। मौसम विभाग के अनुसार देहरादून, हरिद्वार, चमोली, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, बागेश्वर, चंपावत और नैनीताल में अगले दो दिनों के दौरान कई स्थानों पर तेज बारिश हो सकती है। ऐसे में पर्वतीय क्षेत्रों में आवाजाही करने वालों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होगी। राज्य में पिछले 24 घंटे के दौरान भी कई जिलों में अच्छी बारिश हुई। मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून के आंकड़ों के मुताबिक 14 सितंबर की सुबह 8:30 बजे तक बागेश्वर में 25.8 मिलीमीटर, देहरादून में 22.7 मिलीमीटर और अल्मोड़ा में 20.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। पिथौरागढ़ में 14.2, रुद्रप्रयाग में 13, पौड़ी में 9.7, हरिद्वार में 7.3, टिहरी में 6.5 और चमोली में 4.9 मिलीमीटर बारिश हुई। नैनीताल में 4.9 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। वहीं चंपावत में 0.9 और उत्तरकाशी में 1.9 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि ऊधमसिंह नगर में बारिश नहीं हुई। पिछले 24 घंटे में प्रदेश में औसत 9.1 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि सामान्य औसत 6.3 मिलीमीटर है। यानी राज्य स्तर पर बारिश सामान्य से करीब 45 फीसदी अधिक रही। 1 जून से 14 सितंबर तक के आंकड़े भी उत्तराखंड में सामान्य से अधिक बारिश की तस्वीर पेश करते हैं। इस अवधि में प्रदेश में कुल 1146.5 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि सामान्य बारिश 1096.5 मिलीमीटर होनी चाहिए थी। यानी राज्य में अब तक मानसूनी बारिश सामान्य से करीब 5 फीसदी अधिक है। हालांकि, जिलेवार आंकड़े बारिश के असमान वितरण की कहानी बताते हैं। बागेश्वर में सामान्य से 166 फीसदी अधिक बारिश हुई है। यहां 1962.9 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि सामान्य आंकड़ा 738.2 मिलीमीटर है। चमोली में सामान्य से 70 फीसदी, टिहरी में 31 फीसदी और अल्मोड़ा में 29 फीसदी ज्यादा बारिश हुई है। हरिद्वार में भी सामान्य से 15 फीसदी अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई। इसके उलट पौड़ी में सामान्य से 44 फीसदी कम, चंपावत में 25 फीसदी, नैनीताल में 19 फीसदी और उत्तरकाशी में 13 फीसदी कम बारिश हुई है। रुद्रप्रयाग में भी बारिश सामान्य से आठ फीसदी कम रही। मानसून की विदाई से पहले बारिश का यह नया दौर चारधाम यात्रा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री मार्गों पर बारिश से सड़कें प्रभावित होने, भूस्खलन होने और आवाजाही बाधित होने की आशंका बनी रहेगी। तेज बारिश की स्थिति में पर्वतीय मार्गों के साथ हवाई सेवाओं पर भी असर पड़ सकता है। प्रशासन और आपदा प्रबंधन तंत्र को संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने की जरूरत होगी। खासकर पहले से भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों, कमजोर सड़कों और बरसाती नालों के आसपास विशेष सतर्कता जरूरी होगी। इस मानसून सीजन में उत्तराखंड की तस्वीर दिलचस्प है। प्रदेश का औसत बारिश आंकड़ा सामान्य से केवल पांच फीसदी अधिक है, लेकिन जिलों के बीच भारी अंतर है। कहीं सामान्य से दोगुने से भी ज्यादा बारिश हुई, तो कहीं सामान्य बारिश भी पूरी नहीं हो सकी। अब मानसून की विदाई से पहले अगले दो-तीन दिन होने वाली बारिश इस अंतर को और प्रभावित कर सकती है। ऐसे में पहाड़ से मैदान तक प्रशासन के सामने चुनौती सिर्फ बारिश से निपटने की नहीं, बल्कि भूस्खलन, सड़क बंद होने, नदी-नालों के बढ़ते जलस्तर और चारधाम यात्रियों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने की भी होगी।