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उत्तराखंड: मानसून के बाद नया रिकॉर्ड बनाएगा खनन राजस्व,आधुनिक तकनीक से अवैध खनन पर कसा शिकंजा

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देहरादून। उत्तराखंड में मानसून के कारण नदियों से खनिज निकासी की गतिविधियां फिलहाल सीमित हैं। हालांकि,बारिश का मौसम समाप्त होते ही राज्य सरकार और खनन विभाग खनन गतिविधियों को पूर्ण क्षमता के साथ दोबारा शुरू कर राजस्व का एक नया रिकॉर्ड बनाने की तैयारी में जुट गए हैं। पिछले वित्तीय वर्ष में हासिल की गई शानदार सफलताओं और केंद्र सरकार से मिली प्रोत्साहन राशि के बल पर विभाग आने वाले दिनों में खनन क्षेत्र को नया आयाम देने जा रहा है।

मानसून के कारण उत्तराखंड की नदियों में खनिज निकासी फिलहाल सीमित है, लेकिन बारिश का दौर थमने के बाद खनन गतिविधियों को फिर गति देने की तैयारी शुरू हो गई है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में खनन से ₹1,217 करोड़ का रिकॉर्ड राजस्व हासिल करने के बाद अब सरकार की नजर आने वाले वित्तीय वर्ष में नया रिकॉर्ड बनाने पर है। खास बात यह है कि सरकार का निर्धारित लक्ष्य ₹950 करोड़ था, जबकि वास्तविक प्राप्ति लक्ष्य से करीब ₹267 करोड़ अधिक रही। खनन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्राप्त कुल राजस्व में ₹1,130 करोड़ कोषागार, करीब ₹80 करोड़ जिला खनिज फाउंडेशन न्यास और ₹7 करोड़ राज्य खनिज अन्वेषण ट्रस्ट के तहत शामिल हैं। इससे पहले वित्तीय वर्ष 2024-25 में विभाग ने ₹875 करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले ₹1,041 करोड़ राजस्व अर्जित किया था। यानी एक साल में खनन राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज हुई। सरकार के अनुसार पिछले वर्षों में खनन व्यवस्था में किए गए नीतिगत और तकनीकी सुधारों का असर राजस्व संग्रह पर दिखाई दे रहा है। वर्ष 2012-13 में जहां खनन विभाग से करीब ₹110 करोड़ का राजस्व मिलता था, वहीं 2025-26 में यह आंकड़ा बढ़कर ₹1,217 करोड़ तक पहुंच गया। सरकार इसे पारदर्शी खनन व्यवस्था और अवैध खनन पर निगरानी मजबूत करने का परिणाम बता रही है। वैध खनन को बढ़ावा देने के साथ अवैध खनन, परिवहन और खनिज भंडारण पर नियंत्रण के लिए तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया गया है। खनन प्रक्रिया की निगरानी के लिए माइनिंग डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन एंड सर्विलांस सिस्टम लागू किया गया है। इसके तहत देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और नैनीताल में 45 ई-चेक गेट स्थापित किए गए हैं। इन चेक गेट पर खनिज लेकर आने-जाने वाले वाहनों की निगरानी के लिए एएनपीआर कैमरा और आरएफआईडी जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसका उद्देश्य खनिज परिवहन की डिजिटल निगरानी करते हुए नियमों के उल्लंघन और अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है। उत्तराखंड की खनन व्यवस्था में किए गए तकनीकी सुधारों को राष्ट्रीय स्तर पर भी मान्यता मिली है। 28 मार्च 2026 को नई दिल्ली में आयोजित समारोह में एमटीटीएसएस और ई-खन्ना सिक्योरिटी पेपर परियोजनाओं को स्कॉच अवार्ड-गोल्ड से सम्मानित किया गया। वहीं खान मंत्रालय की माइनर मिनरल रिफॉर्म श्रेणी में ‘सी’ श्रेणी के राज्यों में उत्तराखंड को दूसरा स्थान मिला। इसके तहत राज्य को ₹100 करोड़ की प्रोत्साहन राशि प्राप्त हुई। स्टेट माइनिंग रेडीनेस इंडेक्स में प्रदर्शन के आधार पर भी ₹100 करोड़ की अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि मिलने की बात सरकार ने कही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का कहना है कि अवैध खनन रोकने के लिए पारदर्शी व्यवस्था लागू करने का परिणाम खनन राजस्व में दिखाई दिया है। उनके मुताबिक राज्य को खनन क्षेत्र में किए गए सुधारों के लिए केंद्र से कुल ₹200 करोड़ की प्रोत्साहन राशि प्राप्त हो चुकी है। मानसून के दौरान नदियों में खनिज निकासी सीमित रहने के बाद अब सरकार की चुनौती दोहरी है एक ओर राजस्व संग्रह को बढ़ाना और दूसरी ओर पर्यावरणीय संतुलन तथा वैध खनन के मानकों को बनाए रखना। आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि तकनीकी निगरानी और नीतिगत सुधारों के सहारे राज्य खनन राजस्व का नया रिकॉर्ड कायम कर पाता है या नहीं।