लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सुशासन और पारदर्शी डीबीटी व्यवस्था का असर अब धरातल पर साफ़ दिखाई देने लगा है। लखनऊ स्थित लोकभवन में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चालू वित्त वर्ष के लिए पूर्वदशम (कक्षा 9-10) और दशमोत्तर कक्षाओं के 4.60 लाख से अधिक विद्यार्थियों के बैंक खातों में 148 करोड़ रुपये से अधिक की छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति की धनराशि सीधे हस्तांतरित की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने 11 मेधावी विद्यार्थियों को मंच पर अपने हाथों से छात्रवृत्ति प्रमाणपत्र भी सौंपे।
उत्तर प्रदेश में छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति की राशि सीधे विद्यार्थियों के बैंक खातों तक पहुंचाने की प्रक्रिया को सरकार ने और तेज करने का दावा किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को लोकभवन में आयोजित कार्यक्रम में चालू वित्त वर्ष के लिए पूर्वदशम यानी कक्षा नौ-दस और दशमोत्तर कक्षाओं के 4.60 लाख से अधिक विद्यार्थियों के खातों में 148 करोड़ रुपये से अधिक की छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति हस्तांतरित की। मुख्यमंत्री ने 11 विद्यार्थियों को अपने हाथों से छात्रवृत्ति प्रमाणपत्र भी दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि धन के अभाव में किसी भी पात्र विद्यार्थी की पढ़ाई बाधित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए कि पात्र विद्यार्थियों तक हर हाल में समय पर राशि पहुंचे और कोई बच्चा योजना के लाभ से वंचित न रहे। इस वर्ष सरकार का लक्ष्य छात्रवृत्ति का दायरा बढ़ाकर करीब 70 लाख विद्यार्थियों तक पहुंचाना है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने छात्रवृत्ति को लेकर पूर्ववर्ती सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2016-17 में अनुसूचित जाति-जनजाति के विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति नहीं भेजी गई थी। उनके मुताबिक 2017 में सरकार बनने के बाद 2016-17 और 2017-18 की छात्रवृत्ति एक साथ भेजी गई। योगी ने कहा कि पहले प्रदेश में करीब 2900 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति दी जाती थी, जबकि अब यह राशि बढ़कर 6200 करोड़ रुपये से अधिक हो गई है। मुख्यमंत्री के अनुसार पिछले वर्ष 69 लाख विद्यार्थियों को 6200 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति वितरित की गई और पिछले नौ वर्षों में चार करोड़ से अधिक विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति का लाभ मिला है। ये आंकड़े मुख्यमंत्री द्वारा कार्यक्रम में रखे गए। मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले वर्ष विभिन्न कारणों और तकनीकी समस्याओं के चलते अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के करीब चार लाख विद्यार्थी छात्रवृत्ति से वंचित रह गए थे। सरकार ने पोर्टल में सुधार कराया है और अब इन विद्यार्थियों को भी छात्रवृत्ति का लाभ दिए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। उन्होंने समाज कल्याण, पिछड़ा वर्ग कल्याण और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अधिकारियों से कहा कि पात्र विद्यार्थियों को समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जाए। सरकार ने दो अक्टूबर और 26 जनवरी तक छात्रवृत्ति की राशि विद्यार्थियों तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है। इस वर्ष दो अक्टूबर को अवकाश होने के कारण तीन अक्टूबर को राशि हस्तांतरण किया गया। मुख्यमंत्री के मुताबिक पिछले वर्ष अनुसूचित जाति-जनजाति के 26.26 लाख विद्यार्थियों को 2750 करोड़ रुपये, अल्पसंख्यक वर्ग के 5.89 लाख विद्यार्थियों को 360 करोड़ रुपये और पिछड़ा वर्ग के 37 लाख विद्यार्थियों को 3072 करोड़ रुपये छात्रवृत्ति दी गई। इसके अलावा अल्प आय वर्ग के 9.40 लाख विद्यार्थियों को भी छात्रवृत्ति का लाभ मिला। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से छात्रवृत्ति की राशि को केवल खान-पान पर खर्च करने के बजाय किताबें खरीदने और अपनी पढ़ाई को बेहतर बनाने में उपयोग करने की अपील की। उन्होंने पाठ्यक्रम की पुस्तकों के साथ संदर्भ पुस्तकें, महापुरुषों की जीवनियां और ज्ञानवर्धक साहित्य पढ़ने तथा अपना ‘बुक बैंक’ तैयार करने की सलाह दी। योगी ने कहा कि सरकार दो करोड़ युवाओं को टैबलेट देने की दिशा में काम कर रही है, जिनमें करीब 60 लाख युवाओं को अब तक टैबलेट दिए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि शेष पात्र युवाओं को भी जल्द इसका लाभ दिया जाएगा। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए मुख्यमंत्री अभ्युदय कोचिंग योजना का भी उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अब युवाओं को जेईई और नीट जैसी परीक्षाओं की तैयारी के लिए दूसरे राज्यों में जाने की आवश्यकता कम हुई है।मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले बेसिक शिक्षा परिषद में विद्यार्थियों के बीच ड्रॉपआउट दर 19 से 20 प्रतिशत तक थी। उनके मुताबिक विद्यालयों में शौचालय और पेयजल जैसी सुविधाओं की कमी भी इसका एक कारण थी। सरकार ने ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ के माध्यम से विद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं में सुधार किया। उन्होंने दावा किया कि बेसिक शिक्षा परिषद के 1.60 करोड़ बच्चों को इन सुविधाओं का लाभ मिल रहा है। निर्माण श्रमिकों, अनाथ और निराश्रित बच्चों के लिए प्रदेश के 18 मंडलों में अटल आवासीय विद्यालय स्थापित किए गए हैं, जिनमें 18 हजार बच्चों के प्रवेश की जानकारी भी मुख्यमंत्री ने दी। उन्होंने कहा कि सरकार ने अब तक करीब 10 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी है और अगले छह माह में एक लाख और युवाओं को नौकरी देने का लक्ष्य है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर, राज्यमंत्री संजीव गोंड, असीम अरुण, दानिश आजाद अंसारी, नरेंद्र कश्यप और एससी-एसटी आयोग के अध्यक्ष बैजनाथ रावत के संघर्षों का उदाहरण देते हुए विद्यार्थियों से मेहनत और लक्ष्य के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान पीढ़ी के पास शिक्षा और अवसरों के विस्तार के बीच आगे बढ़ने का मौका है।

